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गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

दही बड़े





बाल कविता :प्रकाश मनु 

दही बड़े हम 
दही बड़े .
दौड़े आओ 
मत शरमाओ ,
खाओ भाई खड़े-खड़े .

स्वाद मिलगा 
कहीं न ऐसा 
चखकर  देखो ,
फेको पैसा 
बड़ी चटपटी 
हंसी हमारी ,
खट्टे -मीठे हैं  नखरे 

डंका हमने 
खूब बजाया,
अजब अनोखा
रंग जमाया 
ठेले पर हैं 
खड़े हुए 
लाला ,बाबू बड़े -बड़े .
दही बड़े हम 
दही बड़े .
प्रकाश  मनु 
  जन्म: 12 मई ,1950 .शिकोहाबाद 
 शिक्षा : एम्. एस-सी., एम्. ए.( हिंदी), पी-एच . डी.  
हिंदी बाल कविता का इतिहास  ग्रंथ के अतिरिक्त बच्चों के लिए ढेरों पुस्तकें प्रकाशित .
संपर्क :   545 ,सेक्टर  29. फरीदाबाद    
चित्र गूगल सर्च से साभार


8 टिप्‍पणियां:

  1. मजेदार है दही बड़े की कविता ......

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  2. प्रिय नागेश,
    इस कविता में कुछ पाठांतर है। कहाँ से आया, मेरे लिए कह पाना कठिन है। कविता ली कहाँ से है। हो सकता है, मैंने ही कभी कुछ संशोधन किया हो। या फिर कहीं और से हुआ हो। कविता का मौजूदा रूप भी बुरा नहीं। पर चाहोगे, तो जिस रूप में यह मेरे संग्रह में है, वह भी भेज सकता हूँ। हिंदी में लिख पाना संभव होने से यह आसानी तो हो ही गई।
    फिर कहूँ कि सभी बाल लेखकों को एक मंच पर लाने की यह कोशिश इतनी अच्छी है कि इसकी जितनी भी तारीफ करो, कम है।
    मैं जब भी फुर्सत में होऊँगा, इस पर आने वाली अच्छी रचनाओं पर जरूर टिप्पणियाँ दूँगा।
    मैंने अपने ब्लाग पर भी बाल साहित्य को लेकर लगातार कुछ लिखने का मन बनाया है। उम्मीद है, कुछ समय में वहाँ भी कुछ अच्छी और काम की चीजें पढ़ने को मिल जाएँ।
    मेरे ब्लाग यानी चिट्ठे का पता है-
    prakashmanu-varta.blogspot.com
    आशा है, स्वस्थ-सानंद हो। मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएँ और आशीर्वाद।
    सस्नेह, मनु

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  3. आदरणीय भाई साहब मनु जी ,
    स्नेहिल प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ .सहर्ष बताना चाहूँगा कि....आपकी यह कविता मेरी बिटिया सृष्टि को बहुत प्रिय है . इसे उसने नंदन में पढ़ा था . ....... और मजेदार बात ..... यह .....कि खेल खेल में इसे टाइप भी उसी ने किया है . फिर भी , जिस रूप में यह आपके संग्रह में है, कृपया वह भी भेज दें . उसे पढना आनंदकारी होगा .
    आपका ब्लाग देखकर बहुत ख़ुशी हुयी .आपका आशीर्वाद पाकर तो और भी अच्छा लगा . हाँ , बाल - मंदिर का लिंक तो यह है -http://baal-mandir.blogspot.com/ कृपया ठीक कर लेंगे .
    आपके सतपरामर्श से मैंने विरासत स्तंभ प्रारभ कर दिया है . इसमें बाल साहित्य के युग पुरुषों की रचनाएँ आती रहेंगी .
    पुन: आपको बहुत बहुत आभार .

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  4. मैं कविता का वह आलेख भी पोस्ट कर दूँगा नागेश, जो मेरे संग्रह में है। बिटिया को मेरा बहत-बहुत प्यार दें। आपका लिंक अब ठीक कर दूँगा। इस समय तो श्री द्वारकाप्रसाद माहेश्वरी जी की कविता पढ़ने का मन है। उसे पढ़कर संभव हुआ तो अपनी टीप भी लिखूँगा। सस्नेह- प्र.म.

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  5. प्रिय नागेश, तुम्हारे ब्लाग में यह स्थान मैंने तय कर लिया है जहाँ से अपन समय-समय पर विचार साझे कर सकते हैं। आज तो सिर्फ यह सूचना ही कि मैंने अपने ब्लाग पर बाल साहित्य से जुडी दो संक्षिप्त टिप्पणियाँ दी हैं। बाल साहित्य का आलोचना-पक्ष और बाल साहित्य-मेरे कुछ विचार। उसमें कुछ बातें कही गई हैं। कभी फुर्सत में होओ, तो एक नजर डाल लेना। सस्नेह, प्र.म.

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  6. priya nagesh,
    tumne thik pakda hai. mein asal main aahat hua kuchh baton se. jinhen shayad mein tumse bhi share nahin ker sakta. vah bhi tab jab ki mein din mein 12 se 14 ghante roj mehnat kerke apne dhang se kuchh kam ker raha hoom bal sahitya ke lie. mein kin baton ke liye jeeta-marta raha, yeh to shayad mere jane ke bad hi log jan payenge.
    kher chhodo, is vakt to sirf itna batana tha ki mere bachpan ke ek dost jo ab ahmadabad mein hain aur adhyapak hain, unhone achanak phone ker ke kaha ki are bhai, tumhare dahi-bade to bade swadisht hain. mein poocha kya matlab? is per unhone tumhara aur tumhare blog ka nam liya. ise tum apni safalta man sakte ho. bahut jaldi tumhara blog door-door tak padha jane laga hai. iske liye tumhari prastuti ki bhi tarif karnl padhegi.
    apni poori team ko aor khaske ravendra ko meri badhai.
    aur han, ab aakhiri bat. ravindranath tagore ki yeh 150vin jayanti hai.is uplaksh main kuchh karna chahie. unhone bahut sunder kavitaen likhi hain. unmein se ek meine apne blog per di hai. use dekhna.
    raja ka mahal badi sunder kavita hai.ya fir koi aur kavita kahin se mile, to deni chahie. tagere khali bangla ke nahin, sare desh ke gaurav hain. sasneh, p manu

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  7. मनु जी हिंदी के समर्पित लेखक हैं . यहाँ उनका रोचक और बेहद ही मजेदार गीत पढ़कर बहुत आनंद आया . धन्यवाद .

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टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .