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शनिवार, 14 मई 2011

इब्न बतूता - सर्वेश्वर दयाल सक्सेना



बालगीत : सर्वेश्वर दयाल सक्सेना 
इब्न बतूता , पहन के जूता 

निकल पड़े तूफान में . 
थोड़ी हवा नाक में घुस गई  , 
थोड़ी घुस गई कान में .
कभी नाक को , कभी कान को 
मलते इब्न बतूता . 
इसी बीच में निकल पड़ा 
उनके पैरों का जूता .
उड़ते-उड़ते जूता उनका 
जा पहुँचा जापान में . 
इब्न बतूता खड़े रह गए 
मोची की दूकान में . 

 सर्वेश्वर  दयाल सक्सेना 
जन्म : 15.09.1927 , पिकारा बस्ती 
हिंदी कविता के सशक्त हस्ताक्षर ; 
बाल कविता के गौरव .
बच्चों के अपने कवि .
प्रमुख बाल कविता संग्रह :  बतूता का जूता , मंहगू की टाई ,बिल्ली के बच्चे , भों भों खों खों 
निधन :  24.09.1983



3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर बाल गीत है …….. धन्यवाद ।

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  2. प्रिय नागेश, सर्वेश्वर जी की यह ऐतिहासिक महत्व की कविता प्रस्तुत करने के लिए बधाई। यह हिंदी बाल कविता की कुछ बड़े मयार की श्रेष्ठ और महान रचनाओं में से है जिन्होंने हिंदी बाल कविता की धारा ही बदल दी। सस्नेह, प्र.म.

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