बाल-मंदिर परिवार

हमारे सम्मान्य समर्थक

सोमवार, 5 दिसंबर 2011

डा. बलजीत सिंह की बाल कविता : कुत्ते हैं तैनात

बाल कविता : डा. बलजीत सिंह 
चूहे देने गए परीक्षा,
बिल्ली बनी निरीक्षक.
चूहे थर-थर काँप रहे थे,
देख सामने भक्षक.
चूहों का दल मुख्य परीक्षक
से मिलने को आया.
डरते-डरते उनको अपना 
सारा दर्द सुनाया.
वे बोले- तुम डरो न बिल्कुल,
है पूरी तैयारी.
कुत्ते हैं तैनात, कहो क्या 
कर लेगी बेचारी ?



डा. बलजीतसिंह
      जन्म : 10 जून 1935, ग्राम चाँदनेर (ग़ाजियाबाद)
      शिक्षा : एम.ए., पी-एच.डी. (अँग्रेज़ी)
     कार्यक्षेत्र : पूर्व अध्यक्ष अँग्रेज़ी विभाग, वर्धमान कालेज, बिजनौर (उ.प्र.)
बाल कविता संग्रह ;  हम बगिया के फूल, गाओ गीत सुनाओ गीत, छुट्टी के दिन  बड़े सुहाने,दिन बचपन के (बालगीत-संग्रह)
      पता :शांतिकुंज, 483,  नई बस्ती, बी-14, बिजनौर- 246701
दूरभाष :01342-262419, 9897714214

5 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत मज़ेदार!! बेचारी बिल्ली!!!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. बालक मन के पारखी ,लेखक हैं बलजीत !
    अपने लेखन से सदा ,लेते हैं मन जीत!!
    डा०अजय जनमेजय

    उत्तर देंहटाएं

टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .