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रविवार, 16 जनवरी 2011

ठंडी- ठंडी हवा चली

शिशुगीत : चंद्रमोहन दिनेश 
चित्र में  : सृष्टि 

सर्दी आई , सर्दी आई !
निकले गद्दे ओर रजाई , 
ठंडी- ठंडी  हवा चली 
चौराहों पर आग जली .
दादा जी की खाट कड़ी
छींक रहे हैं घड़ी-घड़ी .
बनी सहेली बच्चों की
पक्की दुश्मन बूढों की
दिनेश जी ने बच्चों के लिए एक सुंदर पुस्तक लिखी है - मछली दीदी सुनो सुनो . इसमें प्यारी - प्यारी बाल कविताएँ   हैं . 

7 टिप्‍पणियां:

  1. कविता अच्छी बन पड़ी है..कवि को बधाई..और सुन्दर ब्लॉग के लिए आपको...

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  2. आदरणीय शर्मा जी , बधाई के लिए आपको हार्दिक धन्यवाद .

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  3. सृष्टि की मुस्कान बहुत सरस लग रही है!

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  4. बहुत खूब । ठंडी हवा चल भी रही है । सामयिक और सुंदर कविता ।

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  5. शुभकामना . सुन्दर कविता है .

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