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गुरुवार, 4 अगस्त 2011

पानी बरसे झम -झम -झम .


बाल कविता : डा, महेंद्र  भटनागर 
पानी बरसे झम  -झम -झम . 
आगे-आगे 
गर्मी भागे 
हँस-हँस गाने गाएँ हम . 
पानी बरसे झम  -झम -झम . 
मेढक बोलें 
पंछी डोलें   
बादल गरजें जैसे बम . 
पानी बरसे झम  -झम -झम . 
नाव चलाएँ 
खूब नहाएँ .
आओ कूदें धम्मक -धम . 
पानी बरसे झम  -झम -झम . 
 डा, महेंद्र  भटनागर  जी
 ग्वालियर में रहते हैं . 
बड़ों के साथ -साथ बच्चों के लिए भी 
बहुत अच्छा साहित्य लिखा है . 

3 टिप्‍पणियां:

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