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रविवार, 26 दिसंबर 2010

दो शिशुगीत

चन्दा आओ
शिशुगीत :सतीश मिश्र
 
अम्मा कहती चन्दा आओ,
दूध कटोरा भर कर लाओ।
 पर चन्दा के हाँथ न पैर,
 कैसे कर पाएगा सैर? 
पर यदि चन्दा आ ही जाए
 मै भी उसके घर जाऊंगी, 
चन्दा की अम्मा के हांथोँ
 दूध भात जी भर खाऊंगी।
 टिम टिम तारोँ से पूंछूंगी 
क्योँ जगते हो सारी रात, 
सूरज दादा को समझाऊं 
जो गुस्सा रहता बिन बात।
सवा सेर की शेर
शिशुगीत :सतीश मिश्र
अनू हमारी  प्यारी  है ,
सब बच्चों से न्यारी है .
यूँ तो बड़ी दिलेर है ,
सवा सेर की शेर है .
पर चूहे से डरती है
ऊँ -ऊँ -ऊँ -ऊँ करती है .
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सतीश मिश्र जी 
शाहजहांपुर में रिलाएंस  में कार्यरत हैं .
 संपर्क : 98385 10163

1 टिप्पणी:

  1. सतीश सर , आपकी कविता बहुत प्यारी है . आप ऐसी और कविताये बनाओ .

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टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .