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बुधवार, 11 मई 2011

ताती ताती एक चपाती -रमेश तैलंग




बाल गीत  : रमेश तैलंग 
ताती ताती एक चपाती , 
दिखी तवे पर पेट फुलाती .
बिल्ली मौसी बोली- 'म्याऊं !
भूख लगी ,मैं तुझको खाऊं .'
सुनकर उछली दूर चपाती ,
बोली फिर आँखें मटकती -
'मौसी पहले मक्खन ला ,
फिर चाहे मुझको खा जा.'
देख चपाती के ठनगन,
बिल्ली ले आई मक्खन .
गुर्राकर फिर बोली - म्याऊं !
अब तो मैं तुझको खा जाऊं ?'
सुनकर उछली दूर चपाती ,
बोली फिर आँखे मटकाती-
'हाँ, हाँ, पहले गुड़ तो ला .
फिर चाहे मुझको खा जा .'
बिल्ली चल दी गुड लाने ,
लगी लौटकर झुँझलाने ,
म्याऊं ! म्याऊं ! म्याऊं ! म्याऊं !
अब मैं खाऊं !अब मैं खाऊं !
मन ही मन में डरी चपाती ,
सोचा- अब तो मरी चपाती .
चिढकर बोली - 'खा नकटी,'
बिल्ल्ली गुस्से में झपटी .
खा ली चप- चप चप्प चपाती , 
हप्प चपाती , गप्प चपाती . 
रमेश तैलंग 
  जन्म: 2 जून ,1946 .टीकमगढ़  
प्रकाशित कृतियाँ : एक चपाती और अन्य बाल कविताएँ , कनेर के फूल , इक्यावन बालगीत 
संपर्क :   गणेश नगर ,शकरपुर , दिल्ली -92   


चित्र गूगल सर्च से साभार


14 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय भाई साहब , यह कविता मुझे बहुत प्रिय है . ... कह सकता हूँ कि बाल साहित्य की २५ श्रेष्ठ कविताओं में एक है यह . धन्यवाद,.

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  2. अले वाह, बहुत सलोना बाल-गीत..बधाई.
    _____________________________
    पाखी की दुनिया : आकाशवाणी पर भी गूंजेगी पाखी की मासूम बातें

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  3. बहुत सुंदर बाल कविता और उतनी ही खूबसूरत प्रस्तुति भी। यह शानदार बिल्ली कहाँ से ढूँढ़़ निकाली संजय। अलबत्ता जिसने भी ढूँढ़ी हो, उसे मेरी तरफ से एक टाफी जरूर खिलवा देना। रहा मेरा-तुम्हारा हिसाब सो चलता ररहेगा।
    वाकई तुमने ठीक कहा, यह बेजोड़ कविता है। और कविता नहीं, कविता में जादू। रमेश तैलंग हमारे आज के दैौर के उन लेखकों में से हैं जिनसे नए ही नहीं, बरसों से लिख रहे पुराने लेखक भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्यार और शुभकामनाएँ प्र.म.

    सेवक जी की कविता पर भभी टिप्पणई दी है मैैंने, जिसमेें कुछ बातोों की चरचचा है। मेरा वादा है कि k

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  4. नागेश, इससे पहले वाली टिप्पणी में बाद की दो पंक्तियाँ असंपादित छूट गई हैं। अगर संभव हो तो हटा देना। प्र,म.

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  5. @ नागेश जी के ब्लॉग पर आने का प्रसाद चपाती जैसे मीठे गीत को पढ़कर मिलेगा सोचा न था... उनको मिले सम्मान और पुरुस्कारों की झड़ी देखी ... अद्भुत प्रतिभा पायी है नागेश जी ने ... अब सभी रचनाओं को पढ़ने का मन बना लिया है.. नेट कुछ समस्या कर रहा है. पढ़ना तो कुछ हद तक सहज है लेकिन लेखन में काफी समय लग रहा है...

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  6. अरे! रमेश तैलंग जी गणेश नगर में ही रहते हैं. .... मतलब घर के बिलकुल पास...

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  7. प्रिय नागेश, रमेश तैलंग की बड़ी सुंदर कविता ली है तुमने। मानो कविता में जादूगरी। इस पर लंबी टिप्पणी लिखी थी, जाने कहाँ गायब हो गई। कविता की प्रस्तुति भी इतनी ही सुंदर और नायाब है। बधाई। सस्नेह, प्र.म.

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  8. आदरणीय मनु भाई साहब , सादर आभार .
    मैंने आपकी लम्बी टिप्पणी पढ़ी थी . यह कैसे हटी , समझ नहीं आता. फ़िलहाल अपने मेल बॉक्स से आपकी टिप्पणी को पुन प्रस्तुत कर रहा हूँ .
    .... और अब अपना पास वर्ड भी बदल रहा हूँ .

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  9. Prakash Manu ने आपकी पोस्ट " ताती ताती एक चपाती " पर एक टिप्पणी छोड़ी है:

    बहुत सुंदर बाल कविता और उतनी ही खूबसूरत प्रस्तुति भी। यह शानदार बिल्ली कहाँ से ढूँढ़ निकाली संजय। अलबत्ता जिसने भी ढूँढ़ी हो, उसे मेरी तरफ से एक टाफी जरूर खिलवा देना। रहा मेरा-तुम्हारा हिसाब सो चलता ररहेगा।
    वाकई तुमने ठीक कहा, यह बेजोड़ कविता है। और कविता नहीं, कविता में जादू। रमेश तैलंग हमारे आज के दैौर के उन लेखकों में से हैं जिनसे नए ही नहीं, बरसों से लिख रहे पुराने लेखक भी बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्यार और शुभकामनाएँ प्र.म.

    उत्तर देंहटाएं
  10. रमेश तैलंग जी हिंदी के समर्पित लेखक हैं . यहाँ उनका रोचक और बेहद ही मजेदार गीत पढ़कर बहुत आनंद आया . धन्यवाद .

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टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .