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रविवार, 5 जून 2011

मूंछे नत्थू लाल की - डा. रोहिताश्व अस्थाना


गुरुवार, 2 जून 2011

खाऊँगी अब दही-बड़ा - उषा यादव




.शिशुगीत: डा. उषा यादव 
ए बी सी डी ई एफ जी ,
पढ़कर सारी अंग्रेजी .
 वन्या बोली-''बहुत पढ़ा,
खाऊँगी अब दही-बड़ा.''
माँ बोली तब हँसकर के -
''उल्टी-पुस्तक को धर के , 
झूँठ-मूँठ का पाठ पढ़ा ,
बिटिया कैसा दही-बड़ा ?''
डा. उषा यादव
जन्म : २ अप्रैल , १९४८ , कानपुर 
शिक्षा : एम्. ए. (हिंदी, इतिहास) 
पी-एच.डी. ; डी. लिट. 
बच्चों के लिए कहानी , उपन्यास , और कविताओं की कई पुस्तकें प्रकाशित . 
संपर्क: ७३, नार्थ ईदगाह कालोनी , आगरा  

बुधवार, 1 जून 2011

एक पहेली मैं कहूँ - अमीर खुसरो




पहेलियाँ : अमीर खुसरो
(1)
एक थाल मोती से भरा , 
सबके सर पर औंधा धरा .
(2)
एक पहेली मैं कहूँ 
सुन ले मेरे पूत .
बाँध गले में उड़ गयी
सौ गज लम्बा सूत .
(3)
बीसों का सर काट लिया , 
ना मारा ना/खून किया 


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शनिवार, 28 मई 2011

पंडित श्री गजराज -काका हाथरसी





मम्मी जी ने बनाए हलुआ-पूड़ी आज , 
आ धमके घर अचानक , पंडित श्री गजराज .
पंडित श्री गजराज ,सजाई भोजन थाली , 
तीन मिनट में तीन थालियाँ कर दीं खाली .
मारी एक डकार ,भयंकर सुर था ऐसा , 
हार्न दे  रहा हो मोटर का ठेला जैसा .
मुन्ना मिमियाने लगा , पढने को न जाऊं , 
मैं तो   हलुआ खाऊंगा बस , और नहीं कुछ खाऊं  .
और नहीं कुछ खाऊं  ,रो मत प्यारे ललुआ ,
 पूज्य गुरूजी ख़तम कर गए सारा हलुआ .
तुझे अकेला हम हरगिज न रोने देंगे , 
चल चौके में , हम सब साथ साथ रोयेंगे . 
 
काका हाथरसी (मूल नाम- प्रभु नाथ गर्ग)
जन्म : 18 सितम्बर , 1906 ,हाथरस    
हिंदी हास्य  कविता के सशक्त हस्ताक्षर . अपने समय में मंचों के पर्याय थे . बच्चों के लिए भी लिखा .  
 निधन :  18 सितम्बर ,1995

*यह  कविता कुण्डलियाँ छंद में है. 

अकडम -बकडम-तिकड़म



बाल कविता : रमेश यादव
अकडम -बकडम-तिकड़म ,
सांप-सीढ़ी खेलम .
जल्दी पासा फेंकम , 
काली जादू मंत्रम .
छम छम - छम छकम ,
एक-दो-तीन गिनम .
सर-सर गोटी सरकम,
जल्दी आगे बढ़म .
सीढ़ी से ऊपर चढ़म   
साँप काटे  नीचे गिरम .
धड़ाम - धड़ाम - धड़ाम ,
नो प्राब्लम - नो प्राब्लम .
खेलम-खेलम-खेलम
जल्दी हंड्रेड करम .
पारी हुयी ख़तम ,
कोई हारम कोई जीतम . 

रमेश यादव
शिक्षा : एम्. ए. (हिंदी )
जन्म :9 अक्तूबर, 1962 , मुम्बई
प्रकाशित बाल कविता संग्रह : महक फूल सा मुस्काता चल
संपर्क : बी- विनायक वासुदेव,चिंचपोकली , पश्चिम , मुम्बई

चित्र गूगल सर्च से साभार

बुधवार, 25 मई 2011

रामू को जुकाम - आनंद प्रकाश जैन



शिशुगीत :आनंद प्रकाश जैन
रामू को जुकाम ने पकड़ा ,
फ़ौरन खटिया पकड़ी . 
नाक देख कर डाक्टर बोला - 
''फीस लगेगी तगड़ी .'' 
बैग खोल कर डाक्टर ने फिर , 
चाकू एक निकाला . 
''नाक काटनी होगी बेटा , 
यह क्या झंझट पाला ?''
खटिया से छलाँग लगाई , 
खाक उड़ी न धूल . 
पंख लगा कर रामू पहुँचा ,
पल भर में स्कूल . 
===========
आनंद प्रकाश जैन जी
 हिंदी के महान बाल साहित्यकार एवं संपादक थे .
'पराग' मासिक  को उन्होंने लोकप्रियता के शिखर तक पहुँचाया. बच्चों के लिए बहुत ही रोचक 
कहानियां , उपन्यास और कविताएँ लिखी .

रविवार, 22 मई 2011

जन्म दिन आपको मुबारक हो -शेरजंग गर्ग






बाल गीत : डा. शेरजंग गर्ग 
जन्म दिन आपको मुबारक हो ,
आपका नाम आस्मां तक हो .
हर ख़ुशी आपके चरण चूमे , 
और आँगन में रोशनी झूमे .
काम भी यादगार लायक हो .
दर्द शरबत समझ के पी जाएँ ,
चाँद तारों की उम्र जी जाएँ .
कोई बाधा कहीं न बाधक हो . 
सबकी आँखों के आप हों तारे ,

आप हों प्यार से अधिक प्यारे . 
हर जगह आप ही की रौनक हो . 
जन्म दिन आपको मुबारक हो .
=-=-=-=-=-=-=-=-=-=
चित्र में हैं सृजन . जन्म दिन : 22 मई 
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डा. शेरजंग गर्ग 
जन्म : 29 मई ,1937
प्रकाशित बाल कविता संग्रह : सुमन बाल गीत ,अक्षर गीत
संपर्क : जी-261-ए,सेक्टर - 22 , नोयडा