मूंछें नत्थूलाल की ,
सचमुच बड़े कमाल की .
पुलिसमैन भी हार गया ,
डाकू भी झख मार गया .
एक इंच से पिछड़ गईं बस ,
मूंछें खास दलाल की .
उन्हें तेल में रोज भिगोते ,
खूब एंठते , खूब सँजोते .
शान देखते ही बनती -
उनकी फौलादी चाल की .
नत्थू को न सताएँ मच्छर ,
मूंछों में फंस जाएँ मच्छर .
बड़े मजे से सो जाते वे ,
चिंता नहीं बबाल की .
चाहें दूध-मलाई खाएँ ,
या फिर रोटी दाल पचाएँ .
नत्थू की मूंछें रखती हैं
खबर पेट के हाल की .
हम सबकी ऐसी हों मूंछें ,
नत्थू की जैसी हों मूंछें .
हम राणा प्रताप के वंशज ,
शोभा भारत भाल की .
जन्म :1 दिसंबर ,1949 :अटवा अली मर्दनपुर , हरदोई
बच्चों के लिए बहुत ही रोचक
कहानियां , उपन्यास और कविताएँ प्रकाशित . बाल गजलें भी खूब लिखीं .
चुने हुए बाल गीत , चुनी हुयी बाल कहानियां , चुने हुए बाल एकांकी उनके संपादन में प्रकाशित महत्वपूर्ण संकलन हैं .
संपर्क : निकट बाबन चुंगी , हरदोई
चित्र गूगल खोज से साभार

