बाल-मंदिर परिवार

हमारे सम्मान्य समर्थक

मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

आया बसंत



बाल कविता : निर्मला सिंह 
चित्रांकन : सलोनी रूपम  
सर्दी का होने लगा अंत , 
आया बसंत ,आया बसंत  .
डाली-डाली पर फूल खिले , 
क्या भीनी-भीनी हवा चले . 
लो, बाग-बगीचे महक उठे , 
पंछी खुश होकर चहक उठे .
तितलियाँ उड़ रही फूलों पर , 
यह मौसम है सबसे सुंदर .
[] [] []
निर्मला सिंह 
हिंदी की चर्चित महिला कथाकार 
बाल कहानी लेखन के नए प्रयोगों के लिए चर्चित .
 जन्म ;९अप्रैल , १९४३ , 
प्रकाशित बाल साहित्य :
  बाल कविता संग्रह : इक्कीस बालगीत , हम हैं हिन्दुस्तानी
बाल कहानी संग्रह :थैंक यू मम्मी सॉरी  पापा , पापा पिकनिक चलो न ,
आसमान से रुई गिर रही है , वाह ! वाह ! बड़े तीरंदाज हैं 
संपर्क : १८५ , सिविल लाइन , बरेली

1 टिप्पणी:

  1. सर्दी का होने लगा अंत ,
    आया बसंत ,आया बसंत .

    बहुत सुन्दर कविता...प्यारी लगी.

    ______________________________
    'पाखी की दुनिया' : इण्डिया के पहले 'सी-प्लेन' से पाखी की यात्रा !

    उत्तर देंहटाएं

टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .