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सोमवार, 7 फ़रवरी 2011

चिड़िया बोली

शिशुगीत : चक्रधर शुक्ल

      चिड़िया बोली -

      ‘‘चूं, चूं, चूं;

      रोज सुबह

      अखबार पढ़ूँ।’’

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      बिल्ली बोली-

      ‘‘म्याऊँ, म्याऊँ;

      मन करता है

      टाफी खाऊँ।’’

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      चूहा बोला-

      ‘‘चीं, चीं, चीं;

      तबियत ढीली

      बिल्ली की।’’

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      बंदर बोला-

      ‘‘खों, खों, खों;

      भूख लगी

      खाने को दो।’’
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      तोता बोला-

      ‘टें, टें, टें;

      सूरज निकला

       मत लेटें।’’

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      कुत्ता बोला-

      ‘‘भौं, भौं, भौं;

      चोर नहीं डरता

      अब क्यों ?’’

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      गदहा बोला-

      ‘‘ढेचूं, ढेचूं;

      बेमतलब -

      सपने क्यों देखूं ?’’

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कौआ बोला-

      ‘‘काँव, काँव;

      शहर से अच्छा

      अपना गाँव।’’

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      सियार बोला-

      ‘‘हुआ, हुआ;

      बुआ न देती

      माल पुआ।’’

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चक्रधर शुक्ल जी
बच्चों के सुपरिचित कवि हैं . 
जन्म : 18 जनवरी १९५७ को 
 खजुहा, जिला फतेहपुर (उ0प्र0) में .
शिक्षा : एम0ए0 ( अर्थ शास्त्र), बी0एस0सी0
दैनिक जागरण, सरिता, नई गुदगुदी, धर्मयुग, बालहंस, नवभारत, पंजाब केसरी
अमर उजाला, चकमक, लोटपोट, रंग चकल्लस, राजस्थान पत्रिका आदि 
अनेक पत्र-पत्रिकाओं तथा संपादित संकलनों में
 लगभग 1000 रचनाएं प्रकाशित। 
सम्पर्क : सिंगल स्टोरी, एल0आई0जी0-1, बर्रा-6,
कानपुर-208027 (उ0प्र0)
मो0 - 9455511337, 0512-2283416
           

1 टिप्पणी:

  1. अति सुन्दर रचना।आदरणीय चक्रधर शुक्ल जी को हार्दिक बधाई।संपादक महोदय का हार्दिक आभार ऐसी रचनाओं से हम सब को रू-ब -रू करवाने के लिए।

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