बाल-मंदिर परिवार

हमारे सम्मान्य समर्थक

मंगलवार, 14 जून 2011

चिडिया ओ चिड़िया -हरिवंशराय बच्चन



बाल कविता : हरिवंशराय बच्चन 

चिडिया ओ चिड़िया 
कहाँ है तेरा घर ?
उड़-उड़ आती है
 जहाँ से फर-फर ?
उड़-उड़ जाती है 
जहाँ को  फर-फर ?

इमली के एक 
बड़े भारी पेड़ पर , 
घास-फूस-तिनकों से 
बना मेरा घर .
उड़-उड़ आती हूँ
वहाँ से फर-फर ?
उड़-उड़ जाती हूँ 
हाँ को फर-फर ?
=============
 हरिवंशराय बच्चन 
 बच्चन जी हिंदी के महान कवि हैं . 
उन्होंने बच्चों के लिए भी सहज -सरस  कविताएँ लिखीं .
 बच्चों के लिए
  उनकी कविताओं के चार संकलन छपे. 



चित्र गूगल सर्च से साभार

10 टिप्‍पणियां:

  1. कविता बाल -मंडली के लिये बहुत उपयुक्त है ।
    सुधा भार्गव

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्यारी सी है चिड़िया की कविता .....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!.....

    उत्तर देंहटाएं
  4. इमली के एक
    बड़े भारी पेड़ पर ,
    घास-फूस-तिनकों से
    बना मेरा घर .
    उड़-उड़ आती हूँ
    वहाँ से फर-फर ?
    उड़-उड़ जाती हूँ
    वहाँ को फर-फर ?...बहुत सुन्दर पंक्तियां है...इतने महान कवि की कविता पढ़वाने के लिये धन्यवाद....

    उत्तर देंहटाएं

टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .