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शनिवार, 7 मई 2011

कानाबाती कुर्र




शिशुगीत : बाल कृष्ण गर्ग 
मेढक बोले टर्र ,
बर्राती है बर्र .
जूता बोले चर्र ,
मोटर चलती घर्र .
मम्मी सोतीं खर्र ,
पापा जाते डर्र .
चिड़िया उडती फुर्र ,
कानाबाती कुर्र .
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नाकाबाती  छीं
सर्दी में थर -थर ,
गर्मी में   लू-लू.
तुम करते हा-हा ,
हम करते हू-हू.
मीठा-मीठा गप,
कड़वा-कड़वा थू.
नाकाबाती  छीं,
कानाबाती  कू .
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सबसे अच्छी नानी 
दूध न पीता गुड्डा , 
हुआ तभी तो बुड्ढा .
खाती दाल न रोटी , 
फिर भी गुड़िया मोटी . 
दिन भर नटखट भैया ,
करता धम्मक -धय्या .
कपडा इतना मँहगा ,
बहना मांगे लंहगा . 
चिढ़ जाते जब चाचा , 
मारे मुझे तमाचा .
पापा करते गड़बड़ ,
मम्मी करतीं बडबड .
खों-खों खाँसे दादी , 
तम्बाकू  की आदी .
सबसे अच्छी नानी ,
कहती रोज कहानी . 
बाल कृष्ण गर्ग 
जन्म : १५ मई , १९४३ , हाथरस 
प्रकाशित कृतियाँ : रोचक शिशु गीत रोचक बालगीत , आटे बाते दही चटाके 
आपके संपादन संगीत मासिक का बाल संगीत अंक (१९८१) साहित्य जगत में विशेष चर्चित . 
संपर्क : ६४७, मुरसान गली , हाथरस 

3 टिप्‍पणियां:

  1. सुंदर शिशुगीत है, खुद ब खुद होंठों पर चढ़ जाने वाला। पर एक साथ तीन-चार शिशुगीत आप बालक़ष्ण गर्ग जी के दे सकते थे। फोटो भी कोई अच्छा हासिल नहीं हो सकता क्या। सस्नेह, प्र.म.

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  2. आदरणीय भाई साहब मनु जी , शिशु गीत तीन कर दिए हैं . फोटो तलाश रहा हूँ . सुझाव के लिए आभार - धन्यवाद .

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टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .