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शुक्रवार, 20 मई 2011

कब तक कब तक - नागेश पांडेय ' संजय '



कब तक कब तक
बालगीत : डा. नागेश पांडेय ' संजय ' 

भूख लगी है,
कब तक कब तक?
खाना-पानी, दें ना नानी
जब तक जब तक, तब तक तब तक।

टीचर से डर,
कब तक कब तक?
रहे अधूरा होम वर्क जी!
जब तक जब तक, तब तक तब तक।

रिमझिम रिमझिम 
कब तक कब तक?
बादल के झोलों में है जल,
जब तक जब तक, तब तक तब तक।

कहो अँधेरा
कब तक कब तक?
हो ना जाये सुखद सवेरा
जब तक जब तक, तब तक तब तक।

मेल-दोस्ती
कब तक कब तक?
जब तक झगड़े को हम रगड़ें
तब तक तब तक, तब तक तब तक।

वीरों की जय
कब तक कब तक?
जब तक सूरज, चाँद, सितारे
तब तक तब तक, तब तक तब तक।

ये सवाल जी
कब तक कब तक?
दे पायें जब तक जवाब हम,
तब तक तब तक, तब तक तब तक।

कब तक कब तक? कब तक कब तक?
जब तक जब तक, तब तक तब तक।
चित्र : गूगल सर्च से साभार

13 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर ...... मजेदार कविता

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  2. बहुत सुन्दर .....रिमझिम रिमझिम कब तक कब तक?
    रिमझिम यहाँ ना आये तक तक तब तक :)

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  3. कहो अँधेरा
    कब तक कब तक?
    हो ना जाये सुखद सवेरा
    जब तक जब तक, तब तक तब तक।...
    बहुत सुन्दर और मजे़दार कविता है

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुन्दर और मजेदार रचना..

    उत्तर देंहटाएं
  5. आपकी उम्दा प्रस्तुति कल शनिवार (21.05.2011) को "चर्चा मंच" पर प्रस्तुत की गयी है।आप आये और आकर अपने विचारों से हमे अवगत कराये......"ॐ साई राम" at http://charchamanch.blogspot.com/
    चर्चाकार:Er. सत्यम शिवम (शनिवासरीय चर्चा)

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  6. भाई नागेशजी

    आपका बाल मंदिर बहुत ही सुन्दर सजा है. आँख भर कर अवलोकन किया और सराहता रहा. सभी की शुभकामनाएं मिल रही हैं मेरी भी स्वीकार करो. आपका एसेमेस भी मिल गया था. मेरी बाल कविता वेबसाइट पर प्रकाशित करने के लिया आभारी हूँ. आप, डॉ. जाकिर अली रजनीश, डॉ. जगदीश व्योम, कई लोग इस दिशा में सराहनीय कम कर रहे हैं. सभी को मेरा साधुवाद. डॉ. दिविक रमेश और प्रकाश मनु से संपर्क बना रहता है. वैसे मेरी सूची में काफी साहित्य-मित्र हैं और सभी मुझ से श्रेष्ठ हैं. उनकी रचनाओं को पढ़कर मनोबल बढ़ता है और प्रेरणा मिलती है.बाल साहित्य ने इन्टरनेट पर अपनी पेठ बढ़ा ली है यह अच्छी बात हुई है. शुभ कामनाओं सहित - रमेश

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  7. रोचक और बेहद ही मजेदार गीत

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  8. ऎसी कवितओं को बच्चे अपने करीब पाते हें ऒर वे उन्हें भाती भी हॆ। शुभकामनाएं । आपके ब्लॉग के लिए बधाई ।सस्नेह, दिविक रमेश

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  9. लिख तो बहु रहे हॆं पर यह हमारा सॊभाग्य हॆ कि हिन्दी बाल-कविता में हमारे पास रमेश तॆंलंग जॆसे समर्थ कवि हॆं । वे मेरे प्रिय कवियों में से एक हॆं । आपके लोकप्रिय ब्लॉग पर ऎसा लिखते हुए मुझे सुख पहुंच रहा हॆ ।

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  10. आप सभी के इस स्नेह और अपनेपन के लिए मैं ह्रदय से आभारी हूँ .

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  11. आसान शब्दों में बहुत ही सुन्दर कविता.

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टिप्पणी के लिए अग्रिम आभार . बाल-मंदिर के लिए आपके सुझावों/ मार्गदर्शन का भी सादर स्वागत है .