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रविवार, 6 फ़रवरी 2011

दादी अम्मा दाँत तुम्हारे


बाल कविता : मानवती आर्या 


दादी अम्मा दाँत तुम्हारे
बाहर क्यों आ जाते हैं ? 
पापा-मम्मी अपने दाँतो 
को न अलग कर पाते हैं . 
क्यों निकालती रोज  सवेरे , 
दाँतो को मुँह से बाहर ?
ब्रश करना क्या नहीं जानती , 
धोती हो बाहर लाकर . 
बिना दाँत के ओंठ तुम्हारे , 
अंदर को घुस जाते हैं . 
बिना दाँत जब कुछ कहती हो , 
समझ नहीं हम पाते हैं .


मानवती आर्या जी 
का जन्म ३० अक्तूबर , १९२० को 
म्यामा ( बर्मा ) के मैक्टिला नगर में हुआ .
 शिक्षा : एम्. ए. (अंग्रेजी , बी. टी. ) , 
आजाद हिंद फ़ौज में रहीं . 
.बाल दर्शन मासिक का संपादन किया  
दादी अम्मा मुझे बताओ उनकी बाल कविताओं का चर्चित संग्रह है .
 संपर्क ; ११७/१११, एम्. काका देव , कानपुर . 

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